भारतीय ट्विटर Koo App क्या है और कैसे प्रयोग करें?

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जैसा की आप जानते हैं, भारत सरकार लगातार चीनी एप्लीकेशन को बंद कर रही है। जिस वजह अपने देश में ऍप विकसित रहे हैं। इसी कड़ी में एक पॉपुलर एप्प बनकर उभरा है Koo App. ये भारत में निर्मित सौ प्रतिशत स्वदेशी एप्प है। कू ऐप को भारत का अपना ट्विटर ऐप माना जा रहा है।

इस पोस्ट में हम इसी Koo App की चर्चा करेंगे। इसके उपयोग का तरीका भी बताएँगे। इस ऐप की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्यूंकि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी खुद मन की बात में इसकी चर्चा कर चुके हैं। दूरसंचार मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद भी इसके बारे में सोशल मीडिया में बता चुके हैं।

MyGov और Niti Aayog द्वारा होस्ट किए गए Aatmanirbhar App Challenge में भारतीय सोशल मीडिया ऐप कू ने दूसरा पुरस्कार जीता है, इसलिए यह सुर्खियों में आया। दिलचस्प बात यह है कि जब भारत के प्रतिबंधित सोशल मीडिया ऐप TikTok के भारत में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

तब भारत में बने सोशल मीडिया ऐप ट्रेंड में आने लगे। लेकिन कू अपने अधिकांश प्रतिद्वंद्वियों के लिए एक अलग रुख है।

यह रुख समाचारों और व्यक्तित्वों पर आधारित है, जो सभी राजनेताओं, खेल हस्तियों और अभिनेताओं को स्थानीय भाषाओं में भारतीयों से जुड़ने में मदद करने के लिए स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करता हैं।

कू ऐप क्या है?

कू भारतीय भाषाओं में भारत का सबसे बड़ा माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है। क्या होगा यदि आपके पास एक ऐप है जहां आप अपनी भाषा में खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं और उसी भाषा में पोस्ट करने वाले अन्य लोगों से जुड़ सकते हैं?

आपको अपने विचारों को अधिक स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने देने के अलावा, यह आपको बारीकियों और सांस्कृतिक संदर्भों को बाहर लाने में मदद करेगा जो अक्सर अंग्रेजी की तरह किसी अन्य भाषा में अनुवाद करने पर खो जाते हैं।

Koo App के फाउंडर कौन हैं?

बैंगलोर के उद्यमियों द्वारा बनाए गए एक माइक्रो-ब्लॉगिंग ऐप कू, के फाउंडर हैं Aprameya Radhakrishna (जो पहले TaxiForSure की सह-स्थापना की थी) और मयंक बिदावतका । देश में अपनी तरह का पहला भाषा-आधारित प्लेटफ़ॉर्म बनाया गया, कू लगभग ट्विटर के भारतीय संस्करण की तरह है। परिभाषित अंतर? आप कन्नड़ में पोस्ट कर सकते हैं!

कू ऐप को क्यों बनाया गया?

आपके मन में ये सवाल होगा की भारत में ट्विटर जब इतना बढ़िया चल रहा है तो कू को लाने की जरुरत क्या थी? तो आइये जानते हैं कू के पीछे का विचार क्या था?

कू के पीछे का विचार बिदावतका और उनके सह-संस्थापक पार्टनर अप्पम्या राधाकृष्ण से आया है। “आंकड़ों के अनुसार, हमने देखा कि हर दिन ट्विटर पर किए गए लगभग 0.05 प्रतिशत पोस्ट केवल भारतीय भाषाओं में थे।

हालाँकि, हमने यह भी नोट किया कि इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक पोस्ट भारतीयों द्वारा हमारे देश में ही बनाए गए थे। इससे हमें यह विश्वास मिला कि भारत में ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म की मांग है।

इस नोट पर, बिदावतका ने कहा कि ट्विटर महानगरीय उपयोगकर्ताओं की ओर अधिक ट्यून किया गया है, जो उपयोगकर्ताओं को प्लेटफॉर्म से जुड़ने या उस पर पोस्ट करने के लिए बाधित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि कू के पास वर्तमान में लगभग 750,000 कुल डाउनलोड हैं, लेकिन दैनिक / मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता गणना का खुलासा नहीं करते हैं, क्योंकि ऐप अभी भी बहुत अधिक चरणों में है।

“हम पहले से ही कन्नड़ में मंच प्रदान करते हैं, जो कि हमने शुरू किया है, और केवल हाल ही में हिंदी, तमिल और तेलुगु को भी पेश किया है। हम पहले से ही उपयोगकर्ताओं को पाठ, ऑडियो और वीडियो में ’कू’ पोस्ट करने की अनुमति देते हैं, और उन्हें ऐप में एक वर्गीकृत the लोगों का दृश्य ’भी दिखाते हैं,” बिदवाटका कहते हैं।

यह it लोगों का दृष्टिकोण सभी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि यह नए उपयोगकर्ताओं को राजनेताओं, अभिनेताओं, खेल हस्तियों, पत्रकारों और अधिक उपयोगकर्ताओं की सूची दिखाता है जैसे ही वे लॉन्च करते हैं। यह ऐसा है कि बिदावतका का मानना ​​है कि कू को भारत में विकास की व्यापक गुंजाइश है।

“पीएम मोदी जैसा व्यक्तित्व TikTok जैसे मंच के साथ जुड़ना नहीं चाहेगा। हालांकि, कू जैसा मंच उन्हें अपने शानदार अनुयायियों तक पहुंचने का अच्छा मौका दे सकता है, जैसे कि गुजराती बोलने वाले, ”बिदवाटका कहते हैं। गुजराती सात कुल मौखिक भाषाओं की सूची में शामिल हैं, जो कू को जल्द ही लॉन्च करने का लक्ष्य रखती हैं, अन्य छह मराठी, बंगला, मलयालम, उड़िया, पंजाबी और असमिया हैं।

बिदावतका बताते हैं कि बहुत सी चीजे सीखने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी भी है जो कि इस लोकल ऐप (मेड इन इंडिया) को बनाने के लिएउधार ली गई है। बाद में, वह कहते हैं, अब 15 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ताओं की मेजबानी करने के लिए ऐप को बढ़ाया गया है।

सरकारी चुनौती जीतने के बारे में बात करते हुए, बिदावतका का कहना है कि यहां से महत्वपूर्ण ड्रॉ वह दृश्यता होगी जो कू को मिलेगी, जो उन्हें उम्मीद है कि ऐप को बढ़ावा देने वाले सरकारी अधिकारियों को खुद को बढ़ावा देगा।

बिदावतका ने कहा, “ट्विटर जैसे ऐप इस वजह से बढ़े हैं क्योंकि उन्हें टीवी चैनलों और अन्य मीडिया में तेजी से उद्धृत किया गया है, जो हमें उम्मीद है कि कू को प्राप्त होने वाले प्रभावों में से एक होगा।”

कू ऐप का प्रयोग कैसे करें?

कू पहले से ही Android के Google Play Store और Apple के iOS ऐप स्टोर दोनों पर उपलब्ध है। कू ऐप का समग्र डिजाइन और लेआउट ट्विटर के समान है, हालांकि यह वास्तव में लंबे समय में ऐप के लिए फायदेमंद हो सकता है।

ऐप को डाउनलोड करने के बाद आप अपने मोबाइल नंबर को दर्ज करके यंहा अकाउंट बना सकते हैं। अकाउंट को वेरीफाई लिए आपके दिए गए नंबर पर OTP भेजा जाता है।

बस आपका अकाउंट बन जाता है। अब आपको अपना प्रोफाइल मैनेज करना है।

यंहा सेटिंग्स में आपको “प्रोफाइल एडिट करें” का ऑप्शन मिलेगा। यंहा आपको अपनी प्रोफाइल फोटो, नाम, हैंडल, लोकेशन,ईमेल आदि सभी जानकारी देनी है।

सभी जानकारी को आप लोकल भाषा या इंग्लिश में भी डाल सकते हैं।

Koo App को कैसे प्रयोग करें इसकी पूरी जानकारी इस वीडियो में है।

कू पर पोस्ट कैसे करें?

पोस्ट करने के लिए आपको +कू के बटन पर क्लिक करना है। इसके बाद आप यंहा हैशटैग के साथ टेक्स्ट,ऑडियो,वीडियो के फॉर्मेट में पोस्ट कर सकते हैं।

इतना ही नहीं आप कोई भी एक्सटर्नल लिंक, यूट्यूब वीडियो का लिंक, पोल या GIF पोस्ट हैं। मतलब ट्विटर की तरह ही है। आपकी कु पोस्ट होने के बाद न्यूज़ फीड में दिखाई देने लगेगी।

Koo App डाउनलोड करने के लिए यंहा क्लिक करें

Download Koo App

अगर आपने koo app पर अपनी प्रोफाइल बना ली है। या बनाने की सोच रहे हैं तो मुझे फॉलो कर सकते हैं मेरा हैंडल है @nitishverma

मेरा निष्कर्ष

मेरी नजर में ये बहुत अच्छा ऐप है। और अपना लोकल मेड है। लेकिन ट्विटर की तरह कामयाब होने के लिए इनको अच्छे डेवलपर टीम और फंडिंग की जरुरत पड़ेगी। यंहा मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा मूषक का। इसके बारे में मैंने पोस्ट भी दी हुई है। इसको आप एक बार जरूर पढ़ें।

Hindi Social Networking Site Mooshak (मूषक.इन )

मूषक भी बहुत अच्छी साइट थी। जो ब्राउज़र और ऐप दोनों जगह काम करती थी। और ये भी जब आई तो मुझे लगा था की ये भारत में ट्विटर को टक्कर देगा।

पर कुछ साल चलने के बाद मूषक बंद हो गई। वजह जो भी रही हो। इंडिया में हम बाहर के ऐप को प्रयोग करने के आदि हो चुके हैं। जिस वजह से भारतीय एप्स को अच्छा रिस्पांस नहीं मिल पाता।

उम्मीद है मूषक की तरह कू का हाल नहीं होगा। और ये बहुत आगे तक जाएगा। हमारी भी आपसे यही गुजारिश है की अपने भारतीय ऐप को प्रमोट करें। ताकि वो और अच्छा कर सकें।

पोस्ट को शेयर कीजिये, जिससे दूसरों तक ये जानकारी पहुँच सकें। और वो भी भारतीय ऐप्प कू के बारे में जान सकें।

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